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कुछ लोग

कुछ लोग

कुछ लोगों से मिलना,
लौटा देता है मेरा बचपन।
उनके साथ उम्र नहीं दिखती,
चाहे आंकड़े दिखाए पचपन।

कुछ लोगों से मिलना,
लौट देता है मेरी मासूमियत।
उनके संग संकुचित नहीं दुनिया,
मानो सारी दुनिया मेरी मिल्कियत।

कुछ लोगों से मिलना,
लौटा देता है मेरी नादानियाँ।
उनके संग होता हूँ दिल से जिंदा,
नहीं कर पाता खुद से बेइमानियाँ।

उन लोगों से बिछड़ना,
छीन लेता है सुनहरी यादें।
तमाम बिछड़े जन याद आते हैं ,
तब बहती आँखें करती हैं फरियादें।

उन लोगों से बिछड़ना,
छीन लेता है मन की कोमलता।
बाहर से मजबूत अंदर से कमजोर,
शब्दों में झलकती भावुक सी निर्बलता।

उन लोगों से बिछड़ना,
धकेल देता है अंधेरे कुँए में।
जहाँ जीवन सुखी सफल तो है,
लेकिन भावनाएँ हार चुका जुए में।

©बिखरी स्याही®

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2 Comments

Aliya khan

26-Aug-2021 03:16 PM

वाह बेहतरीन

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वरुण एकलव्य

17-Oct-2021 08:10 PM

धन्यवाद

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